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वक्त और आदमी एक जैसा होता है कि टिकता नहीं आदमी नीलाम हो जाता है लेकिन वक्त बिकता नहीं

मां की याद रूवा दे सै

उन्ह लम्ह्या मै वापस ल्यादे सै मां की याद रूवा दे सै‌ !! सारी चिंता गलै ले रही सै, सारै दु:खां नै खे री सै । पर एक मन्त्र ले रही है , आप पाच्छै  सोवै, पहल्यां  सबनै सुवा दे सै । मां की याद रूवा दे सै ,उन लम्हया मै वापस ल्या दे सै !! बाबू पूच्छै बेटे तै तन्खा आली के,   मां   पूच्छै बेटा रोटी   खाली     के मां तेरी वाहे आदत जा ली के, तु लूकमा गाजरपाक पहूंचवा दे सै। मां की याद रूवा दे सै ,उनहे लम्ह्या मै वापस ल्यादे सै !! गणे दिन मैं आवै बेटा , मां कै चा सा चढ जे सै  अर बेटै नै देख के मां का पाईया खून बढ जे सै 4 मांगू 5 देवै , मां एक फालतू रोटी खुवा दे सै  मां की याद रुवा दे सै , उन लम्हयां मैं वापस लया दे सै बुड्ढी होगी गोड्डे टूटगे , चालनै के लाले होगे  आंखरी सांस छूट गी , हालण के लाले होगे  जांदी जांदी भी बेटै कै ए जिंदगी लादे सै  मां की याद रूवा दे सै उन लम्हयां मैं वापस ल्यादे सै ASHOK KUMARR  PRE-PHD SCHOLAR  Guru JAMBHESHWAR UNIVERSITY OF SCIENCE AND TECHNOLOGY HISAR About.me/the.ash...
चुम लिया माथा मेरा उसने मुसीबत में भी आंखे खुलीं तो सामने मां थी
मै खरीदे गये गुलाब से मानने वालो मै नही हूं मै तो तेरी शायरी का दिवाना हूं लफ्जो का प्यासा हूं

बाबू

कांधा पै बैठा कै  मेला दिखाण ले जाया करता रूस्या पाछै साईकिल पै गाम मै हंडाया करता खो-खो अर लुक मिचाई मै भी हाथ वो बंडाया करता तेरी आंखया मै तस्वीर छाग्यी , आज याद बाबू की आगी ,सौपै मै एक फोटू पाग्यी||   | साईकल के डंडे पै बैठ के खेत मै जाणा सै ट्यूबल नीचे खुद नहाकै बलद भी नुवाणा सै  खेत आले कोठे मै वोहै बाजरा कादेसी खाणा सै ईतणै मै बाबू की खेत आली त्यारी पाग्यी आज याद बाबू की आग्यी,सोपै मै एक फोटू पाग्यी||
 मुझ जैसे मूर्ख को भी जगा दिया है  लगता है,  समय ने भी अपना हिसाब लगा लिया है
आजकल उंगलियों से अल्फ़ाज़ बेजने वाले राहों , में तुम्हारा दिल कैसे बहलाएंगे
लिखता रहता  हूं उनके दूर जाने के बाद भी  इसी आशा में की कभी तो प्यार पहुंचेगा 
तेरी याद भी बड़ी अजीब अब आयी तो , हंसा कर चली गई वरना  कल इसी ने मुझे रुलाया था 
मजाकिया तो हम भी थे पर , इस ज़िन्दगी ने तो हमे भी पीछे छोड़ दिया

Valentine's write ups

सोच रहा हूं  आज ही  का दिन इश्क़ के लिए मुकर्रर क्यों उसकी बेपन्हा महोबत तो मैं हर रोज़ देखता हूं