बाबू
कांधा पै बैठा कै मेला दिखाण ले जाया करता
रूस्या पाछै साईकिल पै गाम मै हंडाया करता
खो-खो अर लुक मिचाई मै भी हाथ वो बंडाया करता
तेरी आंखया मै तस्वीर छाग्यी ,
आज याद बाबू की आगी ,सौपै मै एक फोटू पाग्यी|| |
साईकल के डंडे पै बैठ के खेत मै जाणा सै
ट्यूबल नीचे खुद नहाकै बलद भी नुवाणा सै
खेत आले कोठे मै वोहै बाजरा कादेसी खाणा सै
ईतणै मै बाबू की खेत आली त्यारी पाग्यी
आज याद बाबू की आग्यी,सोपै मै एक फोटू पाग्यी||
रूस्या पाछै साईकिल पै गाम मै हंडाया करता
खो-खो अर लुक मिचाई मै भी हाथ वो बंडाया करता
तेरी आंखया मै तस्वीर छाग्यी ,
आज याद बाबू की आगी ,सौपै मै एक फोटू पाग्यी|| |
साईकल के डंडे पै बैठ के खेत मै जाणा सै
ट्यूबल नीचे खुद नहाकै बलद भी नुवाणा सै
खेत आले कोठे मै वोहै बाजरा कादेसी खाणा सै
ईतणै मै बाबू की खेत आली त्यारी पाग्यी
आज याद बाबू की आग्यी,सोपै मै एक फोटू पाग्यी||
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