आनन फानन के "कृषि कानून"
कृषि कानून जैसे पास हुए ठीक वैसे ही रद्द हो गए, जी हां आनन फानन में इन्हें अध्यादेश से पास करवा और ठीक इसी तर्ज पर वापिस ले लिया गया ।एक साल से आंदोलनरत किसान अब अपने घर लौटने को है आंदोलन की शुरुआत से ही किसानों में और सरकार में कई दौर की वार्ता चली और जनवरी के बाद इस पर विराम लगा ,26 जनवरी को एक वाकया हुआ और उसके बाद 28 जनवरी को राकेश टिकैत ने जनता से मार्मिक अपील की , अब तक कह सकते हैं कि आंदोलन की बागडोर पंजाब ने संभाल रखी थी लेकिन 28 जनवरी के बाद आंदोलन को गति दी हरियाणा ने और ऐसी गति दी की हरियाणा में किसानों आंदोलनकारियों ने नेताओं का जीना मुहाल कर दिया और अंततः कृषि कानून वापिस हो गये मैं खुद भी सोच रहा था और अनुमान भी लगा रहा था कि क्या सरकार कृषि कानून वापिस ले सकती है , क्योंकि मैंने एक डेटा खंगाला और पाया कि हरियाणा में पिछले दो-तीन सालों में सरकार भंडार गृह पर सालाना कितनी सब्सिडी दे रही है और साल दर साल उसमें कितनी वृद्धि कर रही है वहीं , हरियाणा में ऐसे वेयरहाउस कितनी जगह पर तैयार हो रहें , इस आंकड़े को देख कर और सरकार का रवैया देखकर कभी नहीं लगा कि सरक...